लखीसराय के प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में बीते वर्ष 7 अप्रैल 2025 को आयोजित तीन दिवसीय अशोकधाम महोत्सव के दौरान एक बड़े मंच से मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण किया गया था। कार्यक्रम में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, तत्कालीन जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र, मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी और कई गणमान्य लोग मौजूद थे। उस समय इसे अशोकधाम को डिजिटल पहचान देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया गया था। घोषणा की गई थी कि वेबसाइट पर श्रद्धालुओं को मंदिर का इतिहास, धार्मिक अनुष्ठानों की जानकारी, लाइव आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य आवश्यक सूचनाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएंगी।

लेकिन आज सबसे बड़ा सवाल यही है—वह वेबसाइट आखिर कहां है?

यदि वेबसाइट लॉन्च हुई थी तो उसका डोमेन नाम क्या था? क्या वह आज भी सक्रिय है? यदि नहीं, तो उसे बंद क्यों किया गया? क्या उसके रखरखाव की कोई व्यवस्था थी? इन सवालों का अब तक कोई सार्वजनिक जवाब सामने नहीं आया है। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर "ASHOK DHAM Lakhisarai" नाम से एक फेसबुक पेज मिलता है, जिसमें स्वयं को "Official Facebook Page" बताया गया है। लेकिन उस पेज पर भी मंदिर के बड़े आयोजनों, विशेषकर श्रावणी मेला और अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की नियमित और अद्यतन जानकारी उपलब्ध नहीं दिखती।

उठ रहे हैं कई अहम सवाल

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आखिर किसके पास है अशोकधाम के Official फेसबुक पेज की कमान?

एक और बड़ा सवाल यह भी है कि जिस फेसबुक पेज को "Official Facebook Page" बताया जा रहा है, उसका संचालन आखिर कौन कर रहा है? उस पेज की यूजर आईडी और पासवर्ड किसके पास है? क्या यह मंदिर ट्रस्ट के नियंत्रण में है, जिला प्रशासन के पास इसकी जिम्मेदारी है या किसी निजी व्यक्ति द्वारा इसे संचालित किया जा रहा है? यदि यह वास्तव में आधिकारिक पेज है, तो इसकी जवाबदेही किसकी है? ये ऐसे अहम सवाल हैं, जिनका जवाब आज भी सार्वजनिक नहीं है और जो लोगों के जेहन में लगातार तैर रहे हैं।

बीते वर्ष अशोकधाम महोत्सव के दौरान उद्धघाटन की तस्वीर
बीते वर्ष अशोकधाम महोत्सव के दौरान उद्धघाटन की तस्वीर फोटो: लखीसराय लाइव

जवाबदेही जरूरी है

अशोकधाम केवल लखीसराय ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के प्रमुख शिवधामों में से एक है। यहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में यदि श्रद्धालुओं की सुविधा के नाम पर कोई डिजिटल परियोजना शुरू की गई थी, तो उसकी वर्तमान स्थिति और उस पर हुए सार्वजनिक खर्च की जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए। यह खबर किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप नहीं लगाती, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करती है। अब यह जिम्मेदारी जिला प्रशासन, संबंधित विभाग और अशोकधाम मंदिर ट्रस्ट की है कि वे स्पष्ट करें - आखिर जिस वेबसाइट का भव्य लोकार्पण हुआ था, वह आज कहां है? और उस पर खर्च हुए सार्वजनिक धन का पूरा हिसाब कब सामने आएगा?

कला संस्कृति पदाधिकारी बोले- "मुझे भी डोमेन नहीं पता", अब जवाबदेही किसकी?

इस पूरे मामले में जब लखीसराय लाइव की टीम ने जिला कला, संस्कृति पदाधिकारी मृणाल रंजन से अशोकधाम मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के डोमेन और उसके वर्तमान अस्तित्व के बारे में सवाल किया, तो उनका जवाब था कि उन्हें भी वेबसाइट के डोमेन की जानकारी नहीं है। यह जवाब कई गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस वेबसाइट का लोकार्पण बड़े मंच से किया गया, जिसके जरिए श्रद्धालुओं को लाइव आरती, मंदिर का इतिहास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया, आज उसी वेबसाइट के डोमेन की जानकारी संबंधित अधिकारी के पास भी नहीं है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि क्या वेबसाइट वास्तव में अस्तित्व में थी, या फिर उसका प्रचार केवल उद्घाटन समारोह तक ही सीमित रह गया? गौरतलब है कि मृणाल रंजन स्वयं उस कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद थे, जब वेबसाइट का लोकार्पण किया गया था। ऐसे में एक जिम्मेदार अधिकारी होने के नाते इस परियोजना की जानकारी और उसकी वर्तमान स्थिति से अवगत होना भी उनकी जवाबदेही का हिस्सा माना जा सकता है। जानकारी के अनुसार, अशोकधाम मंदिर की वेबसाइट तैयार कराने और उसके लोकार्पण की पूरी प्रक्रिया में तत्कालीन जिलाधिकारी के करीबी माने जाने वाले फिल्मकार एवं अशोकधाम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य रविराज पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। हालांकि, पूर्व जिलाधिकारी के तबादले के बाद रविराज पटेल भी यहां से चले गए। इसके बाद वेबसाइट का क्या हुआ, इसकी जिम्मेदारी किसके पास रही और उसका रखरखाव किसने किया-यह आज भी स्पष्ट नहीं है। विडंबना यह है कि जिस वेबसाइट को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बड़े स्तर पर लॉन्च किया गया था, आज उसकी जानकारी खोजने के लिए खुद मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी और सदस्य भी प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में यह मामला केवल एक वेबसाइट का नहीं, बल्कि सार्वजनिक जवाबदेही और पारदर्शिता का भी बन गया है।