लखीसराय: अशोकधाम मंदिर के पास सोमवार, 17 अगस्त को जलाभिषेक करने पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच अचानक अफरा-तफरी और भगदड़ की स्थिति उत्पन्न होने के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। घटना में सात लोगों की मौत तथा 25 लोगों के घायल होने के बाद प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच के लिए जांच टीम का गठन किया है।लखीसराय समाहरणालय की जिला गोपनीय शाखा से जारी आदेश के अनुसार, घटना के कारणों, घटनाक्रम और प्रशासनिक एवं व्यवस्थागत पहलुओं की प्रारंभिक जांच अपर समाहर्ता, लखीसराय नीरज कुमार की अध्यक्षता में गठित टीम करेगी।
तीन सदस्यीय जांच टीम गठित
जांच टीम में अपर समाहर्ता नीरज कुमार को अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ अनुमंडल पदाधिकारी, लखीसराय प्रभाकर कुमार तथा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, लखीसराय शिवम कुमार को जांच टीम का सदस्य नामित किया गया है। प्रशासन ने टीम को घटना की परिस्थितियों और उससे जुड़े तमाम पहलुओं की बारीकी से जांच करने की जिम्मेदारी दी है।
अफवाह से भगदड़ तक की होगी जांच
जांच का सबसे अहम बिंदु यह होगा कि बिजली का पोल गिरने और करंट फैलने संबंधी अफवाह कैसे उत्पन्न हुई और उसका प्रसार किन परिस्थितियों में हुआ। टीम इस बात की भी पड़ताल करेगी कि भगदड़ वास्तव में किन कारणों और परिस्थितियों के चलते शुरू हुई। इसके साथ ही घटना के समय मंदिर परिसर और आसपास मौजूद भीड़ की वास्तविक स्थिति, श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के रास्ते, बैरिकेडिंग तथा भीड़ नियंत्रण की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाएगी।
प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी की भी होगी जांच
जिला प्रशासन ने जांच टीम को घटना के समय प्रतिनियुक्त प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारियों तथा उपलब्ध बल की स्थिति की भी जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह देखा जाएगा कि संबंधित अधिकारियों और सुरक्षाबलों द्वारा उस समय क्या-क्या कदम उठाए गए और उनकी कार्रवाई कितनी प्रभावी रही।
CCTV और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान होंगे अहम
जांच के दौरान घटना से संबंधित उपलब्ध CCTV फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों को एकत्र कर उनका परीक्षण किया जाएगा। इससे घटना के वास्तविक क्रम और भगदड़ की परिस्थितियों को स्पष्ट करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए सुझाव भी देगी टीम
जांच केवल घटना के कारणों तक सीमित नहीं रहेगी। टीम को भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन संबंधी सुझाव देने का भी निर्देश दिया गया है।
24 घंटे में प्रारंभिक रिपोर्ट
जिला पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार द्वारा जारी आदेश में जांच टीम को घटनास्थल का निरीक्षण करने, संबंधित अधिकारियों, कर्मियों और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ करने तथा घटना की तारीख से 24 घंटे के अंदर स्पष्ट निष्कर्ष और आवश्यक अनुशंसाओं के साथ प्रारंभिक जांच प्रतिवेदन अधोहस्ताक्षरी के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है। घटना के बाद प्रशासन की ओर से गठित यह जांच टीम अब यह पता लगाएगी कि अशोकधाम में आखिर किन परिस्थितियों में अफवाह फैली, भीड़ बेकाबू क्यों हुई और हादसे को रोकने के लिए मौके पर मौजूद व्यवस्था किस हद तक प्रभावी थी। जांच रिपोर्ट से घटना के वास्तविक कारणों और व्यवस्थागत कमियों को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।






