पटना: शराब बरामदगी से जुड़े एक मामले में पटना हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देते हुए ऐसी शर्त लगाई है, जिसने न्यायिक प्रक्रिया में सुधारात्मक और सामाजिक जिम्मेदारी के पहलू को चर्चा में ला दिया है। पटना हाईकोर्ट ने खगड़िया जिले के परबत्ता थाना कांड संख्या 259/2026 में याचिकाकर्ता उत्तम कुमार को अग्रिम जमानत का लाभ दिया। इसके साथ ही न्यायालय परिसर को हरा-भरा और सुंदर बनाने के लिए ₹15,000 की राशि से फूलों के गमले/पौधे लगाने का प्रावधान किया गया। यह आदेश 2 सितंबर 2026 को माननीय न्यायमूर्ति राजीव राय की एकल पीठ ने Uttam Kumar vs. State of Bihar मामले में पारित किया। मामला Criminal Miscellaneous No. 63052 of 2026 से संबंधित है।
81.450 लीटर विदेशी शराब बरामदगी का मामला
पटना हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, याचिकाकर्ता परबत्ता थाना कांड संख्या 259/2026 में गिरफ्तारी की आशंका के चलते अग्रिम जमानत के लिए अदालत पहुंचा था। प्राथमिकी बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम की धारा 30(a) के तहत दर्ज की गई थी। अभियोजन की कहानी के मुताबिक पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी शराब के कारोबार में संलिप्त है। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी की और एक खुले खेत से 81.450 लीटर विदेशी शराब बरामद/जब्त किए जाने की बात कही गई। इसी बरामदगी के आधार पर प्राथमिकी दर्ज हुई।
अधिवक्ता ब्रजेश वर्मा ने उठाया ‘खुले मैदान’ से बरामदगी का मुद्दा
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ब्रजेश वर्मा ने अदालत के समक्ष महत्वपूर्ण दलील रखी। उन्होंने कहा कि कथित शराब की बरामदगी याचिकाकर्ता के घर अथवा किसी बंद परिसर से नहीं हुई, बल्कि खुले मैदान से हुई है। दलील में यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ केवल एक आपराधिक antecedent होने के कारण उसे इस मामले में जोड़ा गया है। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर मामले में अग्रिम जमानत पर विचार किए जाने की मांग की। अधिवक्ता ने पटना हाईकोर्ट के पूर्व निर्णय Ram Vinay Yadav v. State of Bihar [2019 (2) PLJR 1089] का भी हवाला दिया। बचाव पक्ष की ओर से इस निर्णय के आधार पर अदालत के समक्ष अग्रिम जमानत की maintainability का प्रश्न रखा गया।
₹15 हजार की राशि से लगाए जाएंगे फूलों के गमले
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखा गया। आदेश में दर्ज दलील के अनुसार, आरोपों को स्वीकार किए बिना और मामले के गुण-दोष पर कोई प्रभाव डाले बिना, याचिकाकर्ता ने खगड़िया सिविल कोर्ट परिसर में फूलों के गमले एवं पौधे लगाने के लिए ₹15,000 की राशि देने की सहमति जताई। यह राशि भारतीय स्टेट बैंक के डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), खगड़िया को दिए जाने की बात कही गई। इस शर्त का उद्देश्य न्यायालय परिसर को अधिक सुंदर और हरित बनाने से जुड़ा है। इस तरह जमानत की प्रक्रिया में अदालत ने सामाजिक रूप से सकारात्मक गतिविधि को भी जोड़ा है।
छह महीने तक हर पखवाड़े थाने में देनी होगी हाजिरी
अग्रिम जमानत के साथ अदालत ने अन्य शर्तें भी निर्धारित की हैं। आदेश के अंतिम पेज के अनुसार, याचिकाकर्ता को छह महीने तक प्रत्येक पखवाड़े संबंधित पुलिस स्टेशन में उपस्थित होकर अपनी हाजिरी दर्ज करानी होगी। इस अवधि के बाद उपस्थिति से संबंधित प्रमाणपत्र ट्रायल कोर्ट में प्रस्तुत करना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता किसी भी तरह से गवाहों को प्रभावित, प्रलोभित या धमकाने की कोशिश नहीं करेगा और न ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा। ऐसा होने पर राज्य को जमानत बांड रद्द कराने के लिए कदम उठाने की स्वतंत्रता होगी। इसके अलावा याचिकाकर्ता को भविष्य में किसी आपराधिक अपराध में संलिप्त नहीं होने की शर्त भी दी गई है। शर्तों का उल्लंघन होने की स्थिति में जमानत रद्द कराने की कार्रवाई की जा सकती है।
राज्य ने आपराधिक इतिहास का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से अपर लोक अभियोजक मोहम्मद इफतेखार महमूद ने याचिकाकर्ता की जमानत का विरोध किया। राज्य की ओर से उसके आपराधिक इतिहास का हवाला दिया गया। हालांकि, अदालत के समक्ष बचाव पक्ष की ओर से यह महत्वपूर्ण तथ्य रखा गया कि कथित शराब की बरामदगी खुले खेत से हुई थी। उपलब्ध आदेश में दर्ज तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत का लाभ दिया। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ब्रजेश वर्मा और राज्य की ओर से APP मोहम्मद इफतेखार महमूद ने पक्ष रखा।






