चेन्नई/असम: 18 साल तक परिवार से दूर रहे पिंकू पंडित आखिरकार अपने अपनों से मिल गए। कभी असम के एक परिवार के लापता सदस्य रहे पिंकू को अगस्त 2026 में चेन्नई की सड़कों पर बदहाल स्थिति में पाया गया। हमदर्दी, इलाज, लगातार देखभाल और एक आसान डिजिटल खोज की मदद से उनकी पहचान सामने आई और वर्षों से बिछड़ा परिवार फिर एक हो गया। 11 अगस्त 2026 को पिंकू अपने उन परिजनों से मिल पाए, जो लंबे समय से उनका इंतजार कर रहे थे।

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चेन्नई की सड़कों पर मिले पिंकू

पिंकू पंडित ने अपना परिचय पिंकू दास के तौर पर दिया था। 1 अगस्त 2026 को वे चेन्नई की सड़कों पर मिले। उस समय वे राहगीरों को शायद एक और बेघर और परेशान व्यक्ति नजर आते, लेकिन उदवुम करंगल (Udavum Karangal) के समाजसेवकों ने उनमें एक ऐसे व्यक्ति को देखा, जिसे इलाज, देखभाल और अपने परिवार से दोबारा जुड़ने की जरूरत थी। समाज सेवक श्री मोहन, श्री जैकब और श्री अनामलाई ने पिंकू को सुरक्षित किया। जरूरी पुलिस प्रक्रिया पूरी करते हुए थिरुवेरकाडु पुलिस स्टेशन से उनका मेमो प्राप्त किया गया। इसके बाद उन्हें पुनर्वास के लिए भर्ती कराया गया और लगातार देखभाल व निगरानी में रखा गया।

इलाज और देखभाल से लौटी यादें

पिंकू को पौष्टिक भोजन, सुरक्षित रहने की जगह और लगातार निगरानी उपलब्ध कराई गई। उन्हें मनोरोग विशेषज्ञ से सलाह दिलाई गई और नियमित दवाएं शुरू की गईं। धीरे-धीरे उनकी मानसिक स्थिति में सुधार होने लगा। इलाज और देखभाल के दौरान पिंकू को अपने परिवार और अपने मूल स्थान से जुड़ी बातें याद आने लगीं। उन्होंने जो जानकारी दी, उसके आधार पर समाज सेवक असम के नलबाड़ी जिले के धर्मधमा गांव तक पहुंचे। इसके बाद टीम ने पिंकू द्वारा बताए गए संकेतों के आधार पर इलाके की एक दुकान, ‘खाता शॉप – रिचार्ज एंड बिल पेमेंट’, की पहचान करने के लिए आसान गूगल सर्च का इस्तेमाल किया और दुकानदार से संपर्क साधा।

एक छोटी-सी डिजिटल खोज ने पहुंचाया घर तक संदेश

दुकानदार ने तुरंत जवाब दिया और इलाके में पूछताछ करने के साथ पिंकू के परिवार को सूचित करने में मदद की। परिवार ने पुष्टि की कि पिंकू करीब 18 साल से लापता थे। असम में उनके एक बड़े भाई और पिता थे। जब परिवार को पता चला कि पिंकू चेन्नई में सुरक्षित हैं, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिजन उन्हें वापस लेने के लिए असम से चेन्नई पहुंचे। 18 साल की अनिश्चितता के बाद आखिरकार 11 अगस्त 2026 को पिंकू उन लोगों से मिल पाए, जो इतने वर्षों से उनका इंतजार कर रहे थे।

चार दशकों से जरूरतमंदों की मदद कर रहा उदवुम करंगल

पिंकू की कहानी सिर्फ परिवार से मिलन की कहानी नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सामाजिक सहयोग की मिसाल भी है। श्री एस. विद्यासागर द्वारा स्थापित उदवुम करंगल (Udavum Karangal) पिछले 40 से अधिक वर्षों से मानसिक रूप से बीमार और बेसहारा लोगों की मदद कर रहा है। संस्था का काम केवल भोजन और रहने की जगह उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। सुरक्षा, चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, मरीजों के पुनर्वास के साथ-साथ व्यक्ति की पहचान और उसके परिवार का पता लगाने की लगातार कोशिश भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। पिंकू की कहानी यह बताती है कि किसी व्यक्ति के साथ धैर्य और सम्मान से पेश आने पर उसके अतीत से जुड़ी महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आ सकती हैं, भले ही वर्षों बाद उसकी पहचान तलाशना कितना ही मुश्किल क्यों न हो।

घर लौटने के बाद भी देखभाल जरूरी

परिवार के पास लौटने से पहले पिंकू को करीब एक महीने की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी दवाएं दी गईं। उनके परिवार को भी सलाह दी गई कि वे यह सुनिश्चित करें कि पिंकू नियमित रूप से दवाएं लेते रहें और उनकी स्थिति में सुधार के लिए जरूरी देखभाल और सहयोग जारी रखें। पिंकू की घर वापसी सिर्फ परिवार से दोबारा मिलने की घटना नहीं है। यह उन लोगों के लिए भी उम्मीद की कहानी है, जो सड़कों पर रहने के कारण अपने परिवार और पहचान से दूर हो जाते हैं। सही समय पर मदद, चिकित्सा देखभाल, सामाजिक सहयोग और तकनीक के छोटे-से इस्तेमाल से भी किसी व्यक्ति को उसके अपनों तक वापस पहुंचाया जा सकता है। पिंकू पंडित की 18 साल बाद हुई घर वापसी इस बात की मिसाल है कि इंसानियत, धैर्य और सही दिशा में किए गए प्रयास किसी की जिंदगी को फिर से उसके परिवार से जोड़ सकते हैं।