लखीसराय के अशोकधाम स्थित श्री इन्द्रदमेश्वर महादेव ट्रस्ट की ओर से 20 अप्रैल 2026 (सोमवार) को भव्य दहेज‑मुक्त सामूहिक विवाह का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम मंदिर परिसर स्थित “संस्कार भवन” में दोपहर 12:30 बजे से लेकर लगभग 2:30 बजे तक चलने वाला है, जहाँ दर्जनों जोड़ों के विवाह के साथ‑साथ बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ संदेश भी दिया जाएगा।

ट्रस्ट की इस पहल को लखीसराय जिले के लिए एक स्थायी सामाजिक आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है। लगभग 15–16 सालों से निरंतर चल रहे इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में अब तक क़रीब 500 से ज्यादा जोड़ों का विवाह इसी मंदिर‑परिसर में संपन्न हो चुका है, जो न केवल यहाँ की सामाजिक जड़ें मजबूत कर रहा है बल्कि दहेज और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ भी एक व्यावहारिक बयान दे रहा है।
ट्रस्ट और इसके पीछे नामी शख्सियात
श्री इन्द्रदमेश्वर महादेव ट्रस्ट, अशोकधाम, लखीसराय एक धार्मिक‑सामाजिक संस्था के रूप में काम करता है, जो मंदिर के भौतिक और आध्यात्मिक विकास के साथ‑साथ निःशुल्क शिक्षा, योग और युवा‑उन्मुख सामाजिक कार्यक्रमों से भी जुड़ा है। इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम का वास्तविक संचालन ट्रस्ट के सचिव डॉ. कुमार अमित की अगुवाई में होता है, जबकि जिले के कई समाजसेवी, धार्मिक आचार्य और स्थानीय उद्यमी इसमें स्वयंसेवक और संसाधन दाता के रूप में शामिल होते हैं। ट्रस्ट ने पिछले 16 वर्षों में अपने 16वें वर्ष के चक्र में 18 जोड़ों के दहेज‑मुक्त विवाह संपन्न कराए हैं, जिनसे एक ओर तो लखीसराय‑आसपास के गांवों के जरूरतमंद परिवारों को भारी राहत मिली, तो दूसरी ओर समाज में यह संदेश भी बना कि शादी दहेज और दिखावे का माध्यम नहीं, बल्कि संयम और जिम्मेदारी का बंधन है।
20 अप्रैल 2026 का आयोजन और नव‑दंपतियों के लिए जागरूकता
20 अप्रैल को होने वाला कार्यक्रम सिर्फ विवाह‑समारोह ही नहीं है, बल्कि एक सामाजिक‑नैतिक प्रशिक्षण केंद्र भी बनेगा। संस्कार भवन में आयोजित विवाह समारोह के बाद नव‑दंपतियों को वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों, बाल विवाह के ख़तरों, लैंगिक‑सहानुभूति और पारिवारिक संतुलन के बारे में संक्षिप्त जागरूकता सत्र भी दिए जाएंगे। इसके अलावा, आयोजन समिति की अपील है कि जिलेवासी अधिक से अधिक संख्या में इस उत्सव में शामिल हों, नव‑दंपतियों को आशीर्वाद दें और इस दहेज‑मुक्त आंदोलन को और मजबूत करें।कार्यक्रम के बाद कन्यादान के पश्चात आमंत्रित अतिथियों और नव‑दंपतियों के लिए भोजन की भी व्यवस्था की जाएगी, जो ट्रस्ट की “समाज के साथ खाने, सोचने और बदलने” वाली दर्शन को और प्रतिबिंबित करेगी।लखीसराय के रूप में जिला चाहे छोटा लगे, लेकिन इन्द्रदमेश्वर महादेव ट्रस्ट की यह दहेज‑मुक्त और बाल विवाह‑विरोधी यात्रा इसे एक सामाजिक नई जमीन पर खड़ा कर रही है, जहाँ विवाह सिर्फ घर‑घर का रस्मी अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संकल्प भी बन रहा है।









