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लखीसराय के दिव्यांग अधिवक्ता रवि ने बढ़ाया जिले का मान, भारतीय विधि संस्थान दिल्ली में पीएचडी के लिए हुआ चयन

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संघर्षों को मात देकर हासिल की बड़ी सफलता, NLU दिल्ली से एलएलएम और UGC-NET उत्तीर्ण करने के बाद अब देश के प्रतिष्ठित विधि संस्थान में करेंगे शोध

दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे हार गईं चुनौतियां, लखीसराय के रवि कुमार बने युवाओं के लिए मिसाल

लखीसराय जिले के लिए गर्व और प्रेरणा से भरा एक समाचार सामने आया है। शहर के वार्ड संख्या-12 निवासी दिव्यांग अधिवक्ता रवि Kumar का चयन देश के प्रतिष्ठित विधि शिक्षण एवं शोध संस्थान भारतीय विधि संस्थान (Indian Law Institute), नई दिल्ली के पीएच.डी. (विधि) कार्यक्रम-2026 में पूर्णकालिक शोधार्थी के रूप में हुआ है। उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि पूरे लखीसराय, बिहार और दिव्यांग समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

संघर्षों के बीच तय किया सफलता का सफर

रवि कुमार, अनिल प्रसाद के पुत्र हैं। एक दिव्यांग व्यक्ति होने के बावजूद उन्होंने जीवन में आने वाली चुनौतियों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने लगातार शिक्षा और विधि के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

शिक्षा के क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन

रवि कुमार ने अपनी प्रारंभिक विधि शिक्षा मुंगेर विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री प्राप्त कर पूरी की। इसके बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली से एलएलएम की पढ़ाई की। वहीं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से अर्थशास्त्र में एमए की उपाधि भी हासिल की। शैक्षणिक उपलब्धियों की इस श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने जून 2025 में आयोजित यूजीसी-नेट परीक्षा भी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की, जिससे उनकी अकादमिक क्षमता और शोध के प्रति गंभीरता स्पष्ट होती है।

कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद मिला अवसर

भारतीय विधि संस्थान, नई दिल्ली द्वारा आयोजित पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में अभ्यर्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड, शोध प्रस्ताव और साक्षात्कार का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। इसी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के बाद रवि कुमार का चयन पूर्णकालिक शोधार्थी के रूप में किया गया है। कानून और न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में शोध के लिए देशभर से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आवेदन करते हैं। ऐसे में इस प्रतिष्ठित संस्थान में चयन होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों पर विशेष रुचि

वर्तमान में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत रवि कुमार की विशेष रुचि सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों और विधिक अनुसंधान के क्षेत्र में रही है। उम्मीद की जा रही है कि उनका शोध कार्य विधि शिक्षा और न्यायशास्त्र के क्षेत्र में नए विचारों और महत्वपूर्ण योगदान का मार्ग प्रशस्त करेगा।

लखीसराय के युवाओं के लिए प्रेरणा बने रवि

रवि कुमार की सफलता यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास लगातार जारी रहें तो सफलता अवश्य मिलती है। उनकी उपलब्धि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों या व्यक्तिगत चुनौतियों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं। इस उपलब्धि पर उनके परिवारजनों, मित्रों, अधिवक्ता समुदाय, शिक्षाविदों और शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। लखीसराय के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि जिले का एक युवा अब देश के सर्वोच्च विधि शोध संस्थानों में से एक में अपने शोध के माध्यम से नई पहचान बनाने जा रहा है।

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