लखीसराय शहर के किऊल नदी स्थित रेलवे पुल के नीचे एक ऐसी घटना सामने आई है, जो मानवता के नाम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। रेलवे पुल के पांच नंबर पाया के पास बनी झाड़ियों से स्थानीय लोगों ने एक (लगभग) दो साल के बच्चे को गंभीर अवस्था में बरामद किया। बच्चा इतनी बीमार हालत में था कि उसकी जान बचाने के लिए लोगों ने तुरंत उसे इलाज के लिए लखीसराय सदर अस्पताल पहुंचाया।

जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों को जब रेलवे पुल के पास पहुंचने पर बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी, तो वे झाड़ियों की ओर बढ़े। जैसे ही वे वहां पहुंचे, एक बच्चा गंभीर स्थिति में पड़ा मिला, जिसकी हालत देखकर लोगों की आँखें भी नम हो गईं। बिना किसी विलंब के वे बच्चे को उठाकर सदर अस्पताल ले गए, जहाँ चिकित्सकों ने उसका इलाज तुरंत शुरू कर दिया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने रेलवे पुलिस को भी सूचना दी, लेकिन जानकारी मिलने के अनुसार, रेलवे पुलिस ने “मामला स्थानीय थाने का है” बताकर कोई विशेष तत्परता नहीं दिखाई, जिससे स्थानीय लोगों के मन में निराशा और आक्रोश के साथ‑साथ सवाल भी उठे कि ऐसी मानवता से जुड़ी घटनाओं में किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
आर्थिक तंगी और गरीबी बनी बड़ी वजह ?
अस्पताल में चिकित्सकों के अनुसार, बच्चे के पेट से आंत बाहर निकली हुई है और उसकी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा किसी गंभीर बीमारी या जन्मजात विकृति से ग्रसित प्रतीत होता है, जिसका इलाज अत्यधिक महंगा और जटिल हो सकता है। इसी कारण आशंका जताई जा रही है कि परिजन आर्थिक तंगी और गरीबी के कारण इलाज कराने में असमर्थ रहे होंगे, जिसके चलते उसे इस तरह झाड़ियों के बीच छोड़ दिया गया।फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और नवजात बच्चे के परिजनों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों की यह भी अपील है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ऐसे मामलों में न केवल जांच सख्ती से करें, बल्कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के लिए स्वास्थ्य‑सुरक्षा योजनाएं और आर्थिक राहत योजनाएं भी तुरंत लागू करें, ताकि भविष्य में ऐसी मानवता को झकझोर देने वाली घटनाएं रोकी जा सकें। सामाचार लिखे जाने तक बच्चे की पहचान नहीं हो सकी है।









