Online Hearing, Car Pooling, Work From Home…
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नए सर्कुलर को लेकर देशभर में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मृणाल माधव ने इस सर्कुलर को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए देश की मौजूदा आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा किया है।
मृणाल माधव ने लिखा, “जब देश के प्रधान सेवक कहते हैं कि सोना मत खरीदो, तेल बचाओ, तब समझ आता है कि अर्थव्यवस्था दबाव में है। लेकिन जब सर्वोच्च न्यायालय में भी Online Hearing, Car Pooling और Work From Home जैसी व्यवस्थाएं लागू होने लगें, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर देश में हो क्या रहा है?”
उन्होंने आगे कहा, “बस हमें सच बता दो कि आखिर हो क्या रहा है? क्या हालात सामान्य हैं या कोई बड़ी गड़बड़ी छिपाई जा रही है?”

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जारी सर्कुलर में ईंधन की बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से कुछ मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करने, जजों के बीच Car Pooling को बढ़ावा देने तथा कर्मचारियों को सीमित Work From Home की अनुमति देने की बात कही है। मृणाल माधव की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।

कई लोग इसे केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति से जोड़कर देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि देश की सर्वोच्च संस्थाएं भी अब ईंधन बचत और सीमित संसाधन उपयोग पर जोर देने लगी हैं, तो आम जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, कुछ लोग इसे आधुनिक डिजिटल कार्यप्रणाली और बेहतर संसाधन प्रबंधन की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं। लेकिन अधिवक्ता मृणाल माधव की पोस्ट ने इस पूरे मुद्दे को नई राजनीतिक और आर्थिक बहस के केंद्र में ला दिया है।









