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किऊल-गया रेलवे लाइन के नीचे फैला करंट, पांच भैंसों की दर्दनाक मौत

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वार्ड नंबर 17 में हादसे के बाद मचा हड़कंप, स्थानीय लोगों ने की कार्रवाई और मुआवजे की मांग

लखीसराय जिले के वार्ड नंबर 17 स्थित गणिनाथ सिद्धि विनायक मंदिर के समीप रविवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। किऊल-गया रेलवे लाइन के नीचे अंदरग्राउंड करंट फैल जाने से पांच भैंसों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी और लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। पीड़ित पशुपालक जयराम यादव ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा अपने घर और प्लांट तक बिजली लाइन ले जाने में बरती गई लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ है।

उन्होंने कहा कि अगर समय रहते लोगों ने सूझबूझ नहीं दिखाई होती तो यह घटना और भी भयावह हो सकती थी तथा इंसानी जान भी जा सकती थी। इस हादसे में मेरी तीन भैंस तथा रामबालक यादव की दो भैंस करंट की चपेट में आने से मर गईं। ग्रामीणों के अनुसार सभी भैंसें परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा थीं। दोनों परिवार पशुपालन कर अपने घर का भरण-पोषण करते थे। घटना के बाद पीड़ित परिवारों में मातम पसरा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे लाइन के नीचे फैले करंट की वजह से इलाके में अब भी खतरा बना हुआ है। लोगों ने आशंका जताई कि समय रहते व्यवस्था नहीं की गई तो और भी मवेशियों की जान जा सकती है।

घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और प्रशासन से दोषियों पर कार्रवाई तथा पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग करने लगे। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सूचना देने के बावजूद खबर लिखे जाने तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची थी, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। इलाके के लोगों ने प्रशासन और बिजली विभाग से तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

पांच भैंसों की मौत के बाद रेलवे और बिजली विभाग पर उठे बड़े सवाल

लखीसराय के वार्ड नंबर 17 स्थित गणिनाथ सिद्धि विनायक मंदिर के समीप किऊल-गया रेलवे लाइन के नीचे फैले करंट से पांच भैंसों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और अब सवाल सिर्फ हादसे का नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का भी उठने लगा है।

रेलवे लाइन के अंदर कैसे पहुंचा बिजली का करंट?

स्थानीय लोगों के अनुसार रेलवे अंडरपास और लाइन के नीचे किसी प्रकार का निजी बिजली कनेक्शन या तार ले जाना आसान नहीं होता। रेलवे क्षेत्र को संवेदनशील और प्रतिबंधित इलाका माना जाता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर वहां तक बिजली का तार पहुंचा कैसे? ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगों ने अवैध तरीके से अपने घर और प्लांट तक बिजली लाइन खींच रखी थी। इसी दौरान करंट फैलने से यह हादसा हुआ।

क्या रेलवे की नियमित जांच सिर्फ कागजों तक सीमित?

रेलवे प्रशासन समय-समय पर ट्रैक, अंडरपास और रेलवे क्षेत्र की सुरक्षा जांच करने का दावा करता है। लेकिन इस घटना के बाद स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर नियमित निरीक्षण होता था तो फिर अवैध बिजली लाइन या करंट जैसी खतरनाक स्थिति पहले क्यों नहीं पकड़ी गई? लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती तो पांच बेजुबान जानें नहीं जातीं और इतना बड़ा खतरा पैदा नहीं होता।

रेलवे और बिजली विभाग के नियम क्या कहते हैं?

रेलवे सुरक्षा नियमों के अनुसार रेलवे ट्रैक, पुल, अंडरपास और रेलवे सीमा क्षेत्र के आसपास किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण, तार बिछाना या बिजली कनेक्शन लेना प्रतिबंधित माना जाता है। ऐसा करना यात्रियों और आम लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना जाता है। वहीं बिजली विभाग के नियमों के अनुसार खुले या असुरक्षित तार, पानी भरे इलाके में करंट प्रवाह और बिना सुरक्षा उपकरण के बिजली लाइन चलाना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई और कानूनी प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।

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