पुल में दरारें मिलने के बाद भारी वाहनों पर लगा था प्रतिबंध, असामाजिक तत्वों ने तोड़ी बैरिकेडिंग
लखीसराय। शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले लखीसराय बायपास आरओबी पुल को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। करीब 146.31 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल में दरारें मिलने के बाद भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन अब पुल की सुरक्षा के लिए लगाए गए हाइट बैरियर को असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि एनएच-80 की ओर से आने वाले बड़े वाहनों को रोकने के लिए लगाए गए हाइट बैरियर को तोड़ दिया गया, जिससे कुछ समय के लिए आवागमन भी प्रभावित हुआ। सूचना मिलते ही पथ निर्माण विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त बैरियर को तत्काल दुरुस्त कराया।

पुल की सुरक्षा से खिलवाड़
जानकारी के अनुसार बायपास पुल की जर्जर होती स्थिति को देखते हुए पुल के दोनों छोर पर हाइट बैरियर लगाया गया था ताकि बालू, गिट्टी और अन्य भारी मालवाहक वाहन पुल से नहीं गुजर सकें। इसके बावजूद दिनदहाड़े एक तरफ के बैरियर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर लगे बैरियर को भी तोड़ने का प्रयास किया गया, हालांकि वह पूरी तरह नहीं टूटा लेकिन टेढ़ा हो गया। घटना के बाद विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे अधिकारी
घटना की जानकारी मिलते ही पथ निर्माण विभाग के सहायक अभियंता शिवम कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने तत्काल मिस्त्रियों को बुलाकर क्षतिग्रस्त हाइट बैरियर की मरम्मत करवाई और स्थिति को सामान्य कराया। सहायक अभियंता शिवम कुमार ने बताया कि पुल पर बड़े वाहनों का परिचालन रोकने के उद्देश्य से हाइट बैरियर लगाया गया था। विभागीय इंजीनियरों से सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची और बैरियर को ठीक करा दिया गया। उन्होंने कहा कि बैरियर कैसे टूटा, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी तक नहीं मिल सकी है। प्रथम दृष्टया किसी बड़े वाहन की सीधी टक्कर के निशान भी नहीं मिले हैं। मामले की जांच की जा रही है।

आखिर क्यों बंद किया गया भारी वाहनों का परिचालन?
दरअसल, बीते 10 मई को बिहार राज्य पुल निर्माण निगम और पथ निर्माण विभाग की तकनीकी टीम ने लखीसराय बायपास आरओबी पुल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान पुल के कई स्पेन और अन्य हिस्सों में दरारें तथा संरचनात्मक कमजोरी के संकेत मिले थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने एहतियातन भारी वाहनों के परिचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने बताया था कि लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया गया है। जब तक तकनीकी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।

सबसे बड़ा सवाल: छह साल में कैसे कमजोर हो गया पुल?
लखीसराय बायपास आरओबी पुल का उद्घाटन 16 जून 2020 को किया गया था। करीब 146.31 करोड़ रुपये की लागत से बने इस महत्वाकांक्षी पुल को शहर की ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान माना गया था। लेकिन उद्घाटन के महज छह साल के भीतर ही पुल में दरारें और संरचनात्मक कमजोरी सामने आने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। आम लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर इतने बड़े बजट से बना पुल इतनी जल्दी कमजोर कैसे हो गया।
आईआईटी पटना करेगी स्थिति स्पष्ट
पुल की वास्तविक स्थिति और उसकी भार वहन क्षमता का आकलन करने के लिए आईआईटी पटना की विशेषज्ञ टीम से तकनीकी जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई और भारी वाहनों के परिचालन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल प्रशासन और पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि पुल की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और भारी वाहनों पर लगाया गया प्रतिबंध यथावत जारी रहेगा।










