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लखीसराय के प्रो. अनिल कुमार ने संभाली बिहार की विरासत की कमान, बने कार्यपालक निदेशक

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पटना/लखीसराय। बिहार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण, प्रलेखन एवं संवर्धन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रख्यात पुरातत्वविद् एवं शिक्षाविद् प्रो. अनिल कुमार ने बिहार विरासत विकास समिति के नए कार्यपालक निदेशक के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। पटना स्थित समिति कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान समिति के समन्वयक डॉ. अमित रंजन ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर समिति के सभी पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रो. अनिल कुमार देश के प्रतिष्ठित विश्व भारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन में प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। पुरातत्व, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव रहा है। उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण शोध एवं उत्खनन कार्य संपन्न हुए हैं।

लखीसराय के वलीपुर गांव से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर

प्रो. अनिल कुमार मूल रूप से लखीसराय जिले के पिपरिया प्रखंड अंतर्गत वलीपुर गांव के निवासी हैं। ग्रामीण परिवेश से निकलकर देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में विभागाध्यक्ष बनने और अब बिहार विरासत विकास समिति की जिम्मेदारी संभालने तक का उनका सफर जिले के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत माना जा रहा है। उनकी नियुक्ति से लखीसराय सहित पूरे बिहार में खुशी का माहौल है। जिले के इतिहास, संस्कृति और पुरातात्विक धरोहरों से उनका विशेष लगाव रहा है, जिसका लाभ अब राज्य स्तर पर भी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

लाली पहाड़ी समेत कई पुरातात्विक स्थलों पर किया है शोध कार्य

प्रो. अनिल कुमार और उनकी टीम ने लखीसराय जिले के कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों पर अध्ययन एवं शोध कार्य किया है। विशेष रूप से लाली पहाड़ी सहित जिले के विभिन्न ऐतिहासिक और बौद्धकालीन महत्व के स्थलों के सर्वेक्षण और शोध में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन अध्ययनों ने लखीसराय की ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान दिलाने में योगदान दिया है। उनके शोध कार्यों के कारण जिले के कई पुरातात्विक स्थलों की ओर इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित हुआ।

बिहार की विरासत संरक्षण को मिलेगी नई गति

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रो. अनिल कुमार जैसे अनुभवी पुरातत्वविद् के नेतृत्व में बिहार विरासत विकास समिति राज्य की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, ऐतिहासिक स्थलों के वैज्ञानिक प्रलेखन और विरासत संवर्धन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी। नालंदा, विक्रमशिला, राजगीर, तेलहारा, लखीसराय सहित बिहार के अनेक ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और वैश्विक स्तर पर उनकी पहचान मजबूत करने की दिशा में नई पहल देखने को मिल सकती है।

लखीसराय के लिए गौरव का क्षण

लखीसराय के वलीपुर गांव के निवासी प्रो. अनिल कुमार का बिहार विरासत विकास समिति के कार्यपालक निदेशक पद पर नियुक्त होना जिले के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है। इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व के क्षेत्र में उनके अनुभव का लाभ अब पूरे बिहार को मिलेगा तथा राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को नई दिशा और गति प्राप्त होगी।

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