लखीसराय। नगर परिषद लखीसराय में नक्शा पास कराने के नाम पर 25 हजार रुपये लेने के आरोप में एक नियमित कर्मी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। नगर परिषद के अनुसेवक सह-प्रभारी करसंग्रहकर्ता/प्रभारी सहायक टैक्स दारोगा एवं नक्शा प्रभारी सूरज कुमार राजत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस संबंध में नगर परिषद लखीसराय के कार्यपालक पदाधिकारी की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है।

नक्शा पास कराने के नाम पर 25 हजार लेने का आरोप

जारी अधिसूचना के अनुसार, शहर के पचना रोड निवासी दीपक प्रसाद शर्मा की ओर से सूरज कुमार राजत के खिलाफ नक्शा पास कराने को लेकर आवेदन दिया गया था। आवेदन में आरोप लगाया गया था कि नक्शा पास कराने के नाम पर सूरज कुमार राजत ने अपने बैंक खाते में 25,000 रुपये लिए। आदेश में उल्लेख किया गया है कि इस मामले में सूरज कुमार राजत की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद प्रभारी प्रधान सहायक-सह-लेखापाल तथा प्रभारी स्थापना सहायक-सह-रोकड़पाल की संयुक्त जांच में उनके कृत्य को सरकारी कर्मी होने के नाते गंभीर प्रशासनिक लापरवाही, अनुशासनहीनता एवं मनमानेपन का प्रतीक माना गया।

निलंबन की जारी अधिसूचना
निलंबन की जारी अधिसूचना फोटो: लखीसराय लाइव
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तत्काल प्रभाव से निलंबित

मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के प्रतिकूल पाए जाने तथा बिहार सरकारी सेवक नियमावली 2005 के नियम 9(1) के तहत सूरज कुमार राजत को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10(1) के तहत नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

स्थापना सहायक का कार्यालय किया गया मुख्यालय

अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान सूरज कुमार राउत का मुख्यालय स्थापना सहायक का कार्यालय निर्धारित किया गया है। उन्हें मुख्यालय से बिना अनुमति अनुपस्थित रहने की अनुमति नहीं होगी। वहीं, आदेश में उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया अलग से शुरू किए जाने की बात भी कही गई है। यानी निलंबन के बाद विभागीय स्तर पर मामले की आगे जांच और कार्रवाई की जाएगी। नगर परिषद की इस कार्रवाई के बाद नक्शा स्वीकृति प्रक्रिया और उससे जुड़े कथित लेन-देन को लेकर मामला चर्चा में आ गया है। हालांकि 25 हजार लेने का आरोप शिकायत में लगाया गया है और विभागीय कार्रवाई अभी आगे जारी है। इसलिए आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी।