रांची: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। राज्य गठन के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में माओवादियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है। राजधानी रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान कुल 27 उग्रवादियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। सरेंडर करने वालों में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के 25 सदस्य और जेजेएमपी के 2 उग्रवादी शामिल हैं। इनमें कई जोनल और एरिया कमांडर स्तर के नक्सली भी शामिल बताए जा रहे हैं। इन उग्रवादियों पर अलग-अलग जिलों में सैकड़ों आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि कई पर लाखों रुपये का इनाम भी घोषित था।

हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के सामने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी जमा कराया। पुलिस के अनुसार जमा किए गए हथियारों में एलएमजी, इंसास राइफल, एसएलआर, पिस्टल, मैगजीन और हजारों जिंदा कारतूस शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका मान रही हैं।


‘ऑपरेशन नवजीवन’ का असर
झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन नवजीवन” के तहत यह बड़ी सफलता हासिल हुई है। अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों से सारंडा और आसपास के इलाकों में लगातार दबाव बढ़ाया जा रहा था, जिसके बाद कई उग्रवादियों ने जंगल छोड़कर सरेंडर का रास्ता चुना। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस वर्ष अब तक 26 नक्सली मारे जा चुके हैं, जबकि 44 की गिरफ्तारी हुई है। वहीं आत्मसमर्पण करने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

डीजीपी ने क्या कहा
झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि राज्य में उग्रवाद खत्म करने के लिए पुलिस, झारखंड जगुआर और सीआरपीएफ संयुक्त रूप से अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी लोगों के पुनर्वास और उनके परिवारों की मदद के लिए सरकार पूरी सहायता देगी।डीजीपी ने बाकी सक्रिय नक्सलियों से भी हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
सीआरपीएफ की चेतावनी और अपील
सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह ने कहा कि जंगल में सक्रिय बचे हुए उग्रवादियों के पास अब हिंसा छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि जो लोग हथियार छोड़कर वापस आना चाहते हैं, सरकार उन्हें पूरा अवसर दे रही है।
कई बड़े इनामी नक्सली शामिल
सरेंडर करने वालों में कई ऐसे नक्सली शामिल हैं जिन पर 5-5 लाख रुपये तक का इनाम घोषित था। इनमें जोनल कमांडर, एरिया कमांडर और सक्रिय कैडर स्तर के उग्रवादी शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इन लोगों के खिलाफ चाईबासा, सरायकेला, खूंटी, रांची और गुमला समेत कई जिलों में हत्या, हमला, लेवी व विस्फोट जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि
राज्य में लगातार चल रहे संयुक्त अभियान और बढ़ते दबाव के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं। एक साथ 27 उग्रवादियों का आत्मसमर्पण झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कामयाबियों में से एक माना जा रहा है।









