रांची, 18 अप्रैल 2026 – झारखंड सरकार ने राज्य के प्रशासन को और चुस्त‑दुरुस्त बनाने के मकसद से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों के तबादलों और नई नियुक्तियों का आदेश जारी कर दिया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग की ताज़ा सूचना के अनुसार, इस तबादले में कुल 17 आईएएस अधिकारियों की जिला दंडाधिकारी और उपायुक्त के पदों पर फिर से तैनाती हुई है। इस नई अधिसूचना के साथ ही पुरानी‑नई जिम्मेदारियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं, ताकि जिला स्तर पर बेहतर समन्वय और तेज़ निर्णय‑निष्पादन सुनिश्चित हो सके।


बड़े‑बैच के IAS अधिकारियों की नई जिम्मेदारियां
2013 बैच:
आईएएस राजीव रंजन को पूर्वी सिंहभूम का जिला दंडाधिकारी एवं उपायुक्त बनाया गया है, जहां उन्हें शहरी विकास, राजस्व और जनप्रतिनिधियों के साथ काम करने की चुनौती दी गई है।
2014 बैच:
संदीप कुमार को लातेहार जिले का उपायुक्त नियुक्त किया गया है, जहां ग्रामीण‑आदिवासी विकास और जंगल‑जमीन जैसे नाज़ुक मुद्दे उनकी प्रमुख ज़िम्मेदारी रहेंगे।
मध्यवर्ती बैच (2015–2017) के लिए
2015 बैच:
अनन्य मित्तल को गढ़वा के लिए उपायुक्त बनाया गया है, जो अंतर्राज्यीय सीमा के पास राजस्व और कानून‑व्यवस्था के मद्देनज़र महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।दिलेश्वर महतो को गुमला के उपायुक्त पद पर भेजा गया है, जहां आदिवासी‑केंद्रित योजनाएं और जमीन‑संबंधी विवादों का निपटारा उनकी प्राथमिकता रहेगी।
2016 बैच:
मेघा भारद्वाज को पाकुड़ और लोकेश मिश्रा को गोड्डा का उपायुक्त बनाया गया है। इन जिलों में कृषि, निर्माण और बुनियादी ढांचे पर फोकस बनने की उम्मीद है।
2017 बैच:
शशि प्रकाश सिंह को देवघर, उत्कर्ष गुप्ता को कोडरमा और हेमंत सती को हज़ारीबाग के उपायुक्त पद पर तैनात किया गया है। देवघर विशेष रूप से तीर्थयात्रा और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

2018–2019 बैच के युवा आईएएस
2018 बैच:
मनीष कुमार को पश्चिम सिंहभूम, चंद्रराज को रामगढ़ और रवि आनंद को चतरा का जिला दंडाधिकारी एवं उपायुक्त बनाया गया है। ये युवा अधिकारी औद्योगिक, खनन और ग्रामीण विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
2019 बैच:
दीपक दुबे को साहिबगंज, दिलीप प्रताप सिंह शेखावत को पलामू, सौरभ कुमार भुवानिया को खूंटी, संदीप कुमार मीणा को लोहरदगा और आलोक कुमार को जामताड़ा के जिला दंडाधिकारी एवं उपायुक्त बनाया गया है।
यह फेरबदल इन जिलों में योजनाओं के टारगेटेड कार्यान्वयन को बढ़ावा देने के लिए है।सरकार का उद्देश्य और भविष्य की दृष्टिसरकार के अधिकारियों के अनुसार, यह अधिकारियों का तबादला प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, भ्रष्टाचार कम करने और जनता के सामने तेज़ सेवा व्यवस्था की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। सरकार ने साफ़ रूप से संकेत दिया है कि अब जिला स्तर पर ऑन‑स्पॉट निर्णय लेने वाले अधिकारियों की टीम को और मजबूत बनाया जाएगा, ताकि योजनाएं टेंडर‑टेंडर में अटके नहीं, बल्कि जनहित में तेज़ी से रोलआउट हो सकें।









