CRPF कमांडो से बना कुख्यात अपराधी, फर्जी पहचान के सहारे सूरत में छिपा था; CBI ने गिरफ्तार कर बाढ़ लाया, आज कोर्ट में होगी पेशी
बाढ़/पटना। बिहार के अपराध जगत के सबसे चर्चित और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों में शामिल 3 लाख रुपये के इनामी गैंगस्टर भोला सिंह को आखिरकार कानून के शिकंजे में लाया गया है। पटना जिले के पंडारक निवासी भोला सिंह को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने गुजरात के सूरत से गिरफ्तार करने के बाद ट्रांजिट प्रक्रिया पूरी कर बिहार लाया है। हाथीदह स्टेशन पहुंचने के बाद उसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सड़क मार्ग से बाढ़ थाना लाया गया, जहां से उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा।
12 वर्षों से फरार था, कई राज्यों में एजेंसियों को देता रहा चुनौती
भोला सिंह पिछले एक दशक से अधिक समय से पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ था। वर्ष 2015 से चल रही जांच के दौरान वह लगातार अपनी लोकेशन और पहचान बदलता रहा। CBI के अनुसार वह सूरत में ‘अमित शर्मा’ और ‘गौतम कुमार’ जैसी फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर रह रहा था। आखिरकार तकनीकी निगरानी और मानव खुफिया नेटवर्क की मदद से उसकी लोकेशन ट्रेस की गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
कोलकाता के दो लोगों के अपहरण मामले में हुई गिरफ्तारी
CBI ने भोला सिंह को उस हाईकोर्ट रेफर्ड मामले में गिरफ्तार किया है जिसमें वर्ष 2014 में कोलकाता के दो लोगों के अपहरण के बाद उनके लापता होने की जांच की जा रही थी। यह मामला वर्षों से लंबित था और भोला सिंह इसकी जांच शुरू होने के समय से ही फरार चल रहा था। एजेंसी का मानना है कि गिरफ्तारी के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
बिहार में हत्या, अपहरण और रंगदारी समेत 11 संगीन मामले
भोला सिंह का आपराधिक इतिहास बेहद लंबा और खौफनाक रहा है। बिहार पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, अवैध हथियार और विस्फोटक रखने जैसे गंभीर आरोपों में 11 मामले दर्ज हैं। कई वर्षों तक वह पटना और आसपास के इलाकों में अपराध जगत का बड़ा नाम माना जाता रहा।
CRPF का प्रशिक्षित कमांडो, फिर अपराध की दुनिया में एंट्री
भोला सिंह की कहानी इसलिए भी अलग मानी जाती है क्योंकि अपराध की दुनिया में आने से पहले वह CRPF में जवान था। उसे कमांडो स्तर का प्रशिक्षण भी मिला था। सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली और हथियारों की समझ ने उसे लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचने में मदद की। यही वजह रही कि कई वर्षों तक पुलिस उसे पकड़ने में सफल नहीं हो सकी।
अनंत सिंह से दोस्ती और दुश्मनी दोनों ने बनाया चर्चित चेहरा
बिहार की राजनीति और अपराध जगत में भोला सिंह का नाम कई वर्षों तक चर्चा का विषय रहा। उसका नाम मोकामा क्षेत्र के बाहुबली नेता और पूर्व विधायक अनंत सिंह के साथ दोस्ती और बाद में टकराव दोनों को लेकर सुर्खियों में रहा। अपराध जगत के कई बड़े घटनाक्रमों में उसका नाम सामने आता रहा, जिसके कारण वह पुलिस रिकॉर्ड में हाई प्रोफाइल अपराधी माना जाने लगा।
भाई ने किया सरेंडर, लेकिन भोला लगातार बचता रहा
सरकार ने भोला सिंह और उसके भाई मुकेश सिंह पर 3-3 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। बाद में मुकेश सिंह ने आत्मसमर्पण कर कानूनी प्रक्रिया का सामना किया और जमानत पर बाहर आ गया, लेकिन भोला सिंह लगातार फरार रहा। उसकी गिरफ्तारी को बिहार पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।
2021 के चर्चित हत्याकांडों में भी आया था नाम
भोला सिंह का नाम वर्ष 2021 में पंडारक पूर्वी पंचायत के मुखिया प्रियरंजन कुमार उर्फ गोरेलाल, पंडारक थाना के एएसआई राजेश कुमार और लाल बहादुर की हत्या से जुड़े मामलों में भी सामने आया था। इन मामलों ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी और पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई और तेज कर दी थी।
बाढ़ थाना में सुरक्षा बढ़ी, कोर्ट में पेशी पर सबकी नजर
कुख्यात अपराधी की गिरफ्तारी के बाद बाढ़ थाना और न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान बिहार और पश्चिम बंगाल से जुड़े कई पुराने आपराधिक मामलों के राज खुल सकते हैं। वहीं अपराध जगत और पुलिस महकमे की नजर अब इस बात पर है कि आगे की पूछताछ में भोला सिंह कौन-कौन से बड़े खुलासे करता है।
बड़ी गिरफ्तारी, कई राज खुलने की उम्मीद
करीब 12 साल तक फरार रहने के बाद भोला सिंह की गिरफ्तारी केवल एक अपराधी की गिरफ्तारी भर नहीं मानी जा रही है, बल्कि यह उन कई पुराने मामलों की परतें खोल सकती है जो वर्षों से जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बने हुए हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल और गुजरात तक फैले उसके नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।











