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धीरा पैक्स में धान खरीद घोटाले का आरोप, किसानों ने कहा- 600 क्विंटल दिया, 220 का ही भुगतान

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तीन महीने बाद भी नहीं मिला MSP का पैसा, सहकारिता विभाग से जांच की मांग

लखीसराय। हलसी प्रखंड के धीरा पैक्स में धान अधिप्राप्ति को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितता और किसानों के भुगतान में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। गांव के किसानों ने बिहार सरकार के सहकारिता विभाग को शिकायत पत्र भेजकर पैक्स अध्यक्ष एवं प्रबंधक पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

किसानों का आरोप है कि धान खरीद में फर्जीवाड़ा कर सरकारी राशि का गबन किया गया है तथा वास्तविक किसानों को अब तक भुगतान नहीं किया गया। किसानों ने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार धान खरीद के 48 घंटे के भीतर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की राशि किसानों के खाते में भेजी जानी चाहिए, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई किसानों को भुगतान नहीं मिला है। इससे किसानों में भारी आक्रोश है। घोघसा निवासी किसान राजीव कुमार ने बताया कि वर्ष 2025-26 में उन्होंने लगभग 600 क्विंटल धान पैक्स को दिया था, लेकिन रिकॉर्ड में मात्र 220 क्विंटल ही दिखाया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि बाकी धान का भुगतान आज तक नहीं हुआ है। वहीं किसान शंकर कुमार ने बताया कि उन्होंने करीब 530 क्विंटल धान जमा किया था, लेकिन पैक्स की ओर से केवल 200 क्विंटल का ही कागज दिया गया। बाकी 300 क्विंटल से अधिक धान का भुगतान अब तक लंबित है।

किसानों का आरोप है कि पैक्स में बड़े पैमाने पर धान का गबन किया गया है। शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई फर्जी किसानों के नाम पर भुगतान दिखाकर सरकारी राशि निकाली गई है। किसानों का कहना है कि जिन लोगों के नाम पर भुगतान दिखाया गया है, उनके पास पर्याप्त कृषि भूमि तक नहीं है।

आरोप यह भी है कि पैक्स अध्यक्ष ने अपने परिवार और करीबी लोगों के नाम का उपयोग कर फर्जी भुगतान कराया है। किसानों ने पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई है।
मामले को लेकर सहकारिता पदाधिकारी सुमन कुमारी ने कहा कि किसानों की ओर से धीरा पैक्स में गड़बड़ी की शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

किसानों के प्रमुख आरोप

० धान खरीद के बावजूद पूरा भुगतान नहीं
० रिकॉर्ड में कम मात्रा दर्ज करने का आरोप
० फर्जी किसानों के नाम पर भुगतान
० सरकारी राशि गबन की आशंका
० विभागीय मिलीभगत का आरोप

क्या कहते हैं नियम?

सरकारी नियमों के अनुसार धान अधिप्राप्ति के बाद किसानों को 48 घंटे के भीतर MSP की राशि भुगतान की जानी चाहिए। भुगतान में देरी होने पर संबंधित पैक्स और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।

“हम लोगों ने 600 क्विंटल धान दिया, लेकिन 220 क्विंटल ही रिकॉर्ड में दिखाया गया। बाकी का पैसा आज तक नहीं मिला।” राजीव कुमार, किसान

“530 क्विंटल धान दिया था, लेकिन 200 क्विंटल का ही पेपर दिया गया। बाकी भुगतान लंबित है।” शंकर कुमार, किसान

क्या कहते हैं अधिकारी

“किसानों की शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है।” सुमन कुमारी, सहकारिता पदाधिकारी

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