6 साल में ही “बीमार” पड़ा करोड़ों का बायपास आरओबी, भारी वाहनों की एंट्री बंद, 146 करोड़ का पुल आखिर इतना कमजोर कैसे हो गया?
लखीसराय। बिहार में विक्रमशिला सेतु को लेकर मचे हड़कंप के बीच अब लखीसराय से भी बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले लखीसराय बायपास आरओबी पुल पर भारी वाहनों के परिचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। पथ निर्माण विभाग और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की तकनीकी टीम द्वारा निरीक्षण के दौरान पुल के स्पेन में कई जगह दरारें मिलने के बाद जिला प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया है।

अब ट्रक, ट्रेलर, बस और हाइवा जैसे भारी वाहनों के गुजरने पर अगले आदेश तक प्रतिबंध रहेगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस पुल का उद्घाटन 16 जून 2020 को हुआ था, वह महज 6 साल के भीतर ही खतरनाक स्थिति में कैसे पहुंच गया?

डीएम बोले- पुल में कई जगह दरार, खतरे की आशंका
जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि 10 मई को बिहार राज्य पुल निर्माण निगम और पटना की तकनीकी टीम ने बायपास आरओबी का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान पुल के कई हिस्सों में दरारें और संरचनात्मक कमजोरी सामने आई। डीएम ने कहा कि सुरक्षा को देखते हुए बड़े और भारी वाहनों की आवाजाही पर तत्काल रोक लगाई गई है। साथ ही पुल की मरम्मत का कार्य भी जल्द शुरू कराया जाएगा।
प्रशासन अब बड़े वाहनों को शहर के अंदरूनी मार्गों से निकालने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए विभिन्न जगहों पर चेतावनी बोर्ड और प्रतिबंध संबंधी सूचना लगाई जाएगी।
“लाइफलाइन” पर ब्रेक, अब शहर में बढ़ेगा जाम का संकट
लखीसराय बायपास आरओबी जिले की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में से एक माना जाता है। इसी पुल होकर पटना, बेगूसराय, मुंगेर, भागलपुर और देवघर की ओर भारी वाहनों का आवागमन होता है।
अब भारी वाहनों के प्रतिबंध के बाद शहर के अंदर ट्रैफिक दबाव कई गुना बढ़ने की आशंका है। पहले से जाम की समस्या से जूझ रहे लखीसराय शहर में आने वाले दिनों में हालात और बदतर हो सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर बड़े वाहन शहर के अंदर से गुजरेंगे तो आम लोगों का निकलना मुश्किल हो जाएगा।
पुल निर्माण विभाग पर उठ रहे बड़े सवाल
करीब 146.31 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल को आधुनिक और दीर्घकालिक परियोजना बताया गया था। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही वर्षों बाद पुल में दरारें मिलने से निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
लोग पूछ रहे हैं—
क्या निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता हुआ?
क्या तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया?
आखिर 6 साल में ही पुल की हालत खराब कैसे हो गई?
अगर समय रहते जांच नहीं होती तो क्या कोई बड़ा हादसा हो सकता था? विक्रमशिला सेतु की घटना के बाद अब लखीसराय बायपास आरओबी की स्थिति ने बिहार के पुल निर्माण और मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
दुसरा मलिया-तेतरहाट पुल भी जर्जर
निरीक्षण के दौरान प्रशासन की टीम ने दुसरा मलिया-तेतरहाट पुल का भी जायजा लिया। वहां भी पाया की नींव जर्जर मिली है। डीएम ने बताया कि उस पुल की मरम्मत भी जल्द कराई जाएगी। लगातार सामने आ रही पुलों की खराब स्थिति ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

लोगों में डर, प्रशासन अलर्ट मोड में
भारी वाहनों पर रोक के बाद परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं आम लोगों में भी पुल की सुरक्षा को लेकर डर का माहौल है। फिलहाल प्रशासन अलर्ट मोड में है, लेकिन सवाल यही है कि करोड़ों की लागत से बना पुल आखिर इतनी जल्दी कमजोर कैसे पड़ गया?








