सिर्फ 6 साल में जर्जर हुआ करोड़ों का ROB, IIT जांच में मिली गंभीर संरचनात्मक खामियां; भारी वाहनों की आवाजाही रोकने की सिफारिश
लखीसराय में करोड़ों रुपये की लागत से बना बाइपास रेलवे ओवरब्रिज (ROB) अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। पुल में Structural Distress यानी गंभीर संरचनात्मक क्षति सामने आने के बाद पथ निर्माण विभाग ने संबंधित संवेदक को Blacklist करने की अनुशंसा कर दी है।

इस संबंध में मुख्य अभियंता, दक्षिण, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा अभियंता प्रमुख (कार्य प्रबंधन) को आधिकारिक पत्र भेजा गया है। विभागीय पत्र के अनुसार NH-80 और SH-08 को जोड़ने वाले लखीसराय बाइपास स्थित ROB में गंभीर तकनीकी खामियां पाई गई हैं। IIT पटना द्वारा किए गए निरीक्षण में पुल के Girder में Shear Cracks, POT-PTFE Bearing में खराबी तथा Reinforcement में Corrosion जैसी चिंताजनक कमियों की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इन खामियों का सीधा असर पुल की संरचनात्मक सुरक्षा पर पड़ रहा है। IIT पटना की रिपोर्ट के आधार पर पुल पर भारी वाहनों के आवागमन को तत्काल प्रभाव से रोकने की अनुशंसा की गई है। इसके बाद विभाग ने ROB पर Height Barrier लगाने का निर्देश भी कार्यपालक अभियंता को जारी कर दिया है, ताकि भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण लगाया जा सके।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि एकरारनामा के अनुसार कार्य प्रारंभ की तिथि 19 नवंबर 2013 थी, जबकि कार्य समाप्ति की तिथि 18 नवंबर 2025 निर्धारित थी। हालांकि वास्तविक रूप से पुल निर्माण कार्य 31 मार्च 2020 को ही पूरा कर लिया गया था। लेकिन निर्माण के मात्र छह वर्षों के भीतर ही पुल में इतनी गंभीर क्षति सामने आना निर्माण गुणवत्ता और कार्य निष्पादन पर बड़े सवाल खड़े करता है। मुख्य अभियंता ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि इतने कम समय में ROB का क्षतिग्रस्त होना निर्माण गुणवत्ता में भारी कमी और कार्य में लापरवाही को दर्शाता है, जिसके लिए संवेदक पूरी तरह जिम्मेदार है। मामले को जन सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए संवेदक के खिलाफ Blacklisting की कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

इधर इस पूरे मामले को लेकर जिले में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता कमल किशोर सिंह ने इसी मुद्दे को लेकर आमरण अनशन शुरू किया था। अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आज ही अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे कमल किशोर सिंह का अनशन तुड़वाने के लिए एसडीएम प्रभाकर कुमार सदर अस्पताल पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि डीएम के निर्देश पर सरकार और विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा रही है तथा संबंधित कंपनी को Blacklist करने की भी तैयारी चल रही है।

एसडीएम के इस बयान के कुछ ही घंटे बाद विभागीय स्तर पर संवेदक को Blacklist करने की अनुशंसा वाला पत्र सामने आने से पूरे मामले ने और तूल पकड़ लिया है। मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू योगी, गुड्डू कुमार सहित कई लोग मौजूद रहे। वहीं सदर अस्पताल के उपाधीक्षक अमित कुमार, मैनेजर नंद किशोर भारती और डॉ. आलोक कुमार भी उपस्थित थे। अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि करोड़ों की लागत से बना यह ROB आखिर इतनी जल्दी जर्जर कैसे हो गया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर आगे क्या कार्रवाई होगी।









