लखीसराय/सूर्यगढ़ा। चंडीगढ़ के सेक्टर-45 स्थित बुरैल इलाके में हुए भीषण सिलेंडर ब्लास्ट में बिहार के लखीसराय जिले के एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो सगे भाइयों समेत कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। मृतक और घायल सभी लोग लंबे समय से चंडीगढ़ में रहकर दिहाड़ी मजदूरी का काम करते थे।
मृतक मुन्ना यादव को फाइल फोटो

मृतक की पहचान सूर्यगढ़ा थाना क्षेत्र के सीतारामपुर गांव के रहने वाले मुन्ना कुमार यादव (32) के रूप में हुई है। वहीं घायल होने वालों में उसका भाई सतीश कुमार (29 वर्ष) , महेश कुमार (27 वर्ष), लक्ष्मीपुर गांव के रहनेवाले मनीष कुमार शामिल हैं। सभी लोग चंडीगढ़ के सेक्टर-45, बुरैल इलाके में किराए के मकान में रह रहे थे। परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, 25 मई 2026 की शाम करीब 6 बजे सभी मजदूर काम खत्म कर अपने डेरे पर लौटे थे। कोई हाथ-पैर धो रहा था, कोई खाना बनाने की तैयारी कर रहा था तो कुछ लोग बाहर टहल रहे थे।
घायल सतीश कुमार की फाइल फोटो

इसी दौरान शाम करीब 7 बजे अचानक एक के बाद एक चार गैस सिलेंडर में जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना भयावह था कि पूरा मकान दहल उठा और इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि जिस मकान में मजदूर रह रहे थे, उसके बगल वाले कमरे में अवैध रूप से गैस सिलेंडरों का स्टॉक रखा गया था और खुदरा गैस बेचने का काम किया जाता था। आशंका जताई जा रही है कि गैस रिसाव के बाद सिलेंडरों में विस्फोट हुआ, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ।
घायल महेश कुमार की फाइल फोटो

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ के बुरैल इलाके में हुए इस हादसे के बाद पुलिस और दमकल विभाग मौके पर पहुंचा और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। मामले की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि मकान में बड़ी संख्या में एलपीजी सिलेंडर रखे गए थे और अवैध रिफिलिंग की आशंका भी जताई जा रही है। इधर घटना की सूचना मिलते ही मृतक मुन्ना यादव और घायल के परिजन मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे हावड़ा-अमृतसर ट्रेन से चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गए।
घायल मनीष कुमार की फाइल फोटो


मुन्ना यादव अपने पीछे चार छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनमें तीन बेटियां और एक बेटा शामिल हैं। बच्चों की उम्र करीब 7 साल, 5 साल और 3 साल बताई जा रही है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और मुन्ना ही घर का मुख्य कमाने वाला सदस्य था। घटना के बाद सीतारामपुर और आसपास के गांवों में शोक की लहर दौड़ गई है। गांव के लोग मृतक के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दे रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और घायलों के बेहतर इलाज की मांग की है।








