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“सम्राट चौधरी होंगे मेरे उत्तराधिकारी.” – पहली बार सार्वजनिक मंच से बोले ललन सिंह, बिहार की राजनीति में मचा सियासी भूचाल

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लखीसराय के मोहनपुर से आया बड़ा राजनीतिक संदेश, कहा – “नीतीश कुमार ने खुद तय किया था अपना उत्तराधिकारी”

क्या बिहार में नेतृत्व परिवर्तन का पूरा प्लान पहले से तय था? ललन सिंह के बयान ने NDA राजनीति में छेड़ी नई बहस

लखीसराय : बिहार की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने ऐसा बयान दे दिया है, जिसने राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। पहली बार किसी सार्वजनिक मंच से ललन सिंह ने खुलकर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद अपना उत्तराधिकारी तय किया था और सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाने का फैसला उनका अपना था।


दरअसल, शनिवार को लखीसराय जिले के पिपरिया प्रखंड के मोहनपुर गांव में करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने यह बड़ा राजनीतिक बयान दिया।
मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा —
“नीतीश कुमार जी ने जब छोड़ने का फैसला किया तो अपना उत्तराधिकारी भी उन्होंने ही तय किया कि सम्राट चौधरी मेरा उत्तराधिकारी होगा। सम्राट चौधरी जी ने भी संकल्प लिया है कि नीतीश कुमार जी ने जो रास्ता दिखाया है, उसी रास्ते पर आगे बढ़कर विकसित बिहार बनाने का काम करेंगे।”

बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री, लेकिन फैसले का श्रेय किसे?

बिहार की राजनीति में इस साल बड़ा बदलाव तब आया जब 4 मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पद छोड़कर राज्यसभा जाने का फैसला किया। यह फैसला सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं था, बल्कि आजादी के बाद बिहार में पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता भी खोल रहा था। इसके बाद 15 अप्रैल को भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाकर बिहार भेजा। भाजपा विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को नेता चुना गया और उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। भाजपा ने इसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत के तौर पर पेश किया। लेकिन अब ललन सिंह के बयान ने इस पूरी कहानी को नया मोड़ दे दिया है।

“दिल्ली नहीं, नीतीश ने तय किया बिहार का नेतृत्व”

राजनीतिक जानकारों की मानें तो ललन सिंह का बयान सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक टिप्पणी नहीं है, बल्कि इसके जरिए जेडीयू ने बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। पिछले कुछ समय से भाजपा के कई नेता बिहार में नेतृत्व परिवर्तन और नए राजनीतिक समीकरणों का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे माहौल में ललन सिंह का यह कहना कि “उत्तराधिकारी नीतीश कुमार ने खुद तय किया” सीधे तौर पर भाजपा की “क्रेडिट पॉलिटिक्स” को चुनौती देने वाला माना जा रहा है। इस बयान को जेडीयू की ओर से यह संकेत माना जा रहा है कि बिहार की राजनीति में फैसले दिल्ली के इशारों पर नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के राजनीतिक अनुभव और रणनीतिक फैसलों से तय होते हैं।

मोहनपुर में विकास योजनाओं की सौगात

दरअसल, कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास था। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने मोहनपुर गांव में 1 करोड़ 67 लाख रुपये की लागत से बने नवनिर्मित +2 उच्च विद्यालय भवन का उद्घाटन किया।
वहीं 30 करोड़ 74 लाख रुपये की लागत से बनने वाले पिपरिया प्रखंड सह अंचल कार्यालय भवन सह आवासीय परिसर का नारियल फोड़कर और रिमोट के माध्यम से शिलान्यास किया गया। कार्यक्रम में बिहार सरकार की मंत्री लेशी सिंह और श्रवण कुमार भी मौजूद रहे। नेताओं का स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं, गाजे-बाजे और भव्य स्वागत के साथ अभिनंदन किया।

अब बिहार की राजनीति में क्या होगा?

ललन सिंह के बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। क्या यह जेडीयू का शक्ति प्रदर्शन है? क्या NDA के भीतर नेतृत्व को लेकर अंदरूनी संदेश दिया गया है? या फिर आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक जमीन तैयार की जा रही है? फिलहाल इतना तय है कि मोहनपुर के मंच से दिया गया यह बयान बिहार की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।

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