चार महीने पहले नौकरी की तलाश में घर से निकला था बौराम हेमराम, मानसिक रूप से बीमार होने के बाद सड़कों पर भटकने लगा था
चेन्नई। मानवता और सामाजिक सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश करते हुए 42 वर्ष पुराने सामाजिक संगठन ‘उदवुम करंगल’ ने मानसिक रूप से बीमार एक युवक को बचाकर महज छह दिनों के भीतर उसके परिवार से मिलवा दिया। संगठन के इस प्रयास की स्थानीय स्तर पर सराहना हो रही है। जानकारी के अनुसार, 25 वर्षीय बौराम हेमराम 29 मई 2026 को चेन्नई के अन्ना नगर स्थित ‘उदवुम करंगल’ के प्रशासनिक कार्यालय के आसपास भटकता हुआ मिला था।

उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह अपनी व्यक्तिगत जानकारी भी स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहा था। संगठन के संस्थापक एवं समाजसेवी पापा विद्याकर की नजर उस पर पड़ी, जिसके बाद उसे संगठन के तिरुवेरकाडु स्थित शांतिवनम होम में आश्रय दिया गया। वहां उसे भोजन, कपड़े और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई। संगठन के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता श्रीनिवास राव ने लगातार उससे बातचीत कर उसकी पहचान और घर-परिवार से जुड़ी जानकारी जुटाने का प्रयास किया।

अगले दिन युवक ने पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के पतिराजपुर गांव का नाम बताया। मिली जानकारी के आधार पर संगठन ने स्थानीय लोगों से संपर्क कर युवक के परिवार का पता लगाया। सूचना मिलने के बाद उसकी मां तालमोयी हासदा और सौतेले पिता मंजू मुर्मू पश्चिम बंगाल से चेन्नई पहुंचे। परिवार ने बताया कि बौराम चार महीने पहले नौकरी की तलाश में चेन्नई आया था, लेकिन काम नहीं मिलने और लगातार परेशानियों के कारण उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी।


3 जून 2026 को संगठन ने बौराम हेमराम को उसके माता-पिता को सौंप दिया। इस दौरान उसे एक माह की नि:शुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं तथा परिवार को उसके उपचार और नियमित जांच की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई। परिवार ने भावुक होकर कहा कि यदि पापा विद्याकर और ‘उदवुम करंगल’ की टीम उसे नहीं बचाती, तो शायद वह कभी घर नहीं लौट पाता।

उन्होंने संगठन और उसके संस्थापक का आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि 1983 में स्थापित ‘उदवुम करंगल’ अब तक लगभग 5,500 मानसिक रूप से बीमार और बेसहारा लोगों को बचाकर उनका पुनर्वास कर चुका है। संगठन का दावा है कि उपचार के बाद इन लोगों को भारत के 27 से अधिक राज्यों तथा विदेशों में उनके परिवारों से मिलाया गया है।









