14 और 17 जून की भर्ती परीक्षा में सेंटरिंग की थी तैयारी, भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद; कई जिलों में मचा हड़कंप
पटना/बेगूसराय/लखीसराय। 14 और 17 जून को आयोजित होने वाली मद्यनिषेध सिपाही, कक्षपाल एवं चलंत दस्ता सिपाही भर्ती परीक्षा से पहले बिहार में एक बड़े भर्ती माफिया नेटवर्क का खुलासा हुआ है। बेगूसराय पुलिस और तकनीकी शाखा की संयुक्त कार्रवाई में परीक्षा में सेंटरिंग कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ा तो पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड BMP का सिपाही नंदन कुमार सामने आया, जिसे कैमूर से गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस की कार्रवाई ने बिहार की भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बेगूसराय पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गुप्त सूचना के आधार पर बखरी थाना क्षेत्र के जीतपुर गांव में छापेमारी की गई, जहां से परीक्षा में नकल कराने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जखीरा बरामद हुआ।
बरामद सामानों में 38 वॉकी-टॉकी, 7 ब्लूटूथ डिवाइस, 6 चार्जर, विशेष इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, माइक्रोफोन, मोबाइल फोन, सिम आधारित उपकरण, मेटल डिटेक्टर समेत कई अन्य सामग्री शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इन उपकरणों के माध्यम से परीक्षा केंद्र के बाहर से अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाने की तैयारी थी।

कार्रवाई के दौरान राजेश रोशन और दुलारचंद कुमार को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद नेटवर्क के तार कैमूर तक पहुंचे, जहां से BMP सिपाही नंदन कुमार की गिरफ्तारी हुई। जांच एजेंसियों का मानना है कि पूरे नेटवर्क का संचालन उसी के स्तर से किया जा रहा था। सबसे गंभीर बात यह है कि जिस परीक्षा को लेकर बिहार सरकार और केंद्रीय चयन परिषद ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की है, उसी परीक्षा में सेंटरिंग कराने के लिए संगठित गिरोह सक्रिय था। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो सकता था। उधर लखीसराय सहित कई जिलों में प्रशासन पहले से ही हाई अलर्ट पर है। लखीसराय में 11 परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी, जैमर, बायोमेट्रिक सत्यापन, उड़नदस्ता टीम और विशेष पुलिस बल की तैनाती की गई है। डीएम और एसपी ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बेगूसराय में हुए इस खुलासे के बाद अब निगाहें बिहार पुलिस मुख्यालय, आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और केंद्रीय चयन परिषद पर टिकी हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस नेटवर्क की पहुंच अन्य जिलों तक भी थी, कितने अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया था और भर्ती परीक्षा माफिया का यह नेटवर्क कब से सक्रिय था। फिलहाल यह कार्रवाई बिहार की भर्ती परीक्षाओं में सेंध लगाने की कोशिश करने वाले संगठित गिरोहों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।










