कोरोना काल में बंद हुए ठहराव को बहाल करने की मांग पर रेलवे अधिकारियों का सकारात्मक रुख, क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर
कजरा (लखीसराय)। किऊल-जमालपुर रेलखंड के अतिमहत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में शामिल कजरा रेलवे स्टेशन पर वर्षों से लंबित ट्रेनों के ठहराव की बहाली और यात्री सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग को लेकर मंगलवार को आयोजित शांतिपूर्ण धरना आंदोलन के बाद क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत मिली है। रेलवे अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में कई महत्वपूर्ण मांगों पर सकारात्मक सहमति बनी, जिससे स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है।


सुबह से ही बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र, व्यवसायी एवं नियमित यात्री कजरा रेलवे स्टेशन परिसर में एकत्र हुए और कोरोना काल के दौरान बंद किए गए महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव को पुनः शुरू करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ट्रेनों के ठहराव समाप्त होने से क्षेत्र के हजारों यात्रियों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करीब तीन घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद रेलवे अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल स्टेशन पहुंचा और आंदोलनकारियों से वार्ता की। चर्चा के दौरान अधिकारियों ने क्षेत्रवासियों की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया।

वार्ता के दौरान मुजफ्फरपुर–भागलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस, राजेंद्र नगर–बांका एक्सप्रेस तथा रांची–भागलपुर वनांचल एक्सप्रेस के कजरा स्टेशन पर ठहराव की मांग को आगे बढ़ाने और संबंधित प्रस्ताव को मंडल स्तर पर भेजने की बात कही गई। अधिकारियों ने संकेत दिया कि इस दिशा में जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जा सकता है। यात्री सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की ओर से स्टेशन पर 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए दो जवानों की नियमित तैनाती की घोषणा की गई।

इससे यात्रियों को सुरक्षा के साथ-साथ स्टेशन परिसर में बेहतर व्यवस्था का लाभ मिलेगा। धरना स्थल पर रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ एवं स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। आंदोलन में शामिल लोगों ने इसे क्षेत्र की एकता और जनसहभागिता की जीत बताते हुए उम्मीद जताई कि जल्द ही ट्रेनों के ठहराव को लेकर ठोस निर्णय लिया जाएगा। आंदोलन में राजीव कुमार सिंह, विजय सिंह राजपूत, हेमंत कुमार हिमांशु, राजकुमार महतो, अरविंद कुमार, जितेंद्र दास, ललन कुमार, दिलीप आहुजा, पारस मंडल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।







