तीन दिनों से जलमीनार का मोटर खराब, डायलिसिस सेंटर में पानी का संकट; मरीज बोला- डीएम को फोन किया तो मिला हैरान करने वाला जवाब
लखीसराय। एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे कर रही है, दूसरी तरफ लखीसराय सदर अस्पताल में डायलिसिस जैसे जीवनरक्षक उपचार पर पानी का संकट भारी पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच सदर अस्पताल स्थित डायलिसिस सेंटर में बीते कई दिनों से पानी की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण मरीजों को पूरा डायलिसिस नहीं मिल पा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि मरीजों को चार घंटे की जगह महज दो घंटे का डायलिसिस देकर वापस भेजा जा रहा है। डायलिसिस मरीज गौतम कुमार ने बताया कि पानी की समस्या काफी गंभीर हो चुकी है।


गुरुवार को जब वह डायलिसिस कराने सदर अस्पताल पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि सेंटर में पानी उपलब्ध नहीं है। पूछताछ करने पर जानकारी मिली कि पानी की सप्लाई बंद है, जिसके कारण मरीजों को आधे समय का ही डायलिसिस दिया जा रहा है। गौतम कुमार ने कहा कि डायलिसिस मरीजों के लिए निर्धारित समय तक उपचार बेहद जरूरी होता है। यदि पूरा डायलिसिस नहीं हो तो मरीज की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस गंभीर समस्या को लेकर उन्होंने जिलाधिकारी को फोन पर अवगत कराने की कोशिश की तो उन्हें निराशाजनक जवाब मिला।

मरीज का कहना है कि इस तरह की प्रतिक्रिया से पीड़ित मरीज और उनके परिजन खुद को असहाय महसूस करते हैं। इधर पूरे मामले पर सदर अस्पताल के मैनेजर नंदकिशोर भारती ने बताया कि डायलिसिस सेंटर को पानी की आपूर्ति लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के जलमीनार से होती है। सदर अस्पताल के समीप स्थित जलमीनार का मोटर पिछले तीन दिनों से खराब पड़ा है। विभाग को इसकी सूचना भी दी गई है, लेकिन अब तक मरम्मत नहीं कराई गई है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सदर अस्पताल परिसर में मौजूद बोरिंग से पानी की सप्लाई डायलिसिस सेंटर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि डायलिसिस सेंटर में पानी की खपत अधिक होने के कारण अस्पताल के अन्य मरीजों को भी ध्यान में रखते हुए व्यवस्था करनी पड़ रही है।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जीवन और मौत से जूझ रहे डायलिसिस मरीजों की जिम्मेदारी किसकी है? यदि एक खराब मोटर तीन दिनों तक नहीं बदल पाती और मरीजों का उपचार प्रभावित होता है, तो स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है। क्या जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर जागेंगे, या मरीज इसी तरह व्यवस्था की लापरवाही का शिकार होते रहेंगे?






